INFLATION  MEANING IN HINDI

inflation meaning in hindi

meaning of inflation in Hindi 

Inflation- मुद्रास्फीति INFLATION  MEANING IN HINDI

Inflation (मुद्रास्फीति)  उस दर को कहते है जिसके,अंतर्गत एक निश्चित समय के पश्चात एक वस्तु या सेवा का मूल्य बढ़ जाता है जिसे हम सामान्य भाषा में महगांई कहते है।

उदाहरण के रूप में देखें तो अगर आज से ५ साल पहले १००० रुपए में अगर १ क्विंटल गेहूं आता था तो वर्तमान समय में १००० रुपए में ही गेहूं ७०० या ८०० ग्राम आयेगा।inflation के कारण रुपए या मुद्रा की कीमत कम हो जाती है। अगर आप ने १० वर्ष पहले १ लाख रुपए कमाए तो वर्तमान में उस रुपए की कीमत निश्चित रूप से घट जाएगी । हर वर्ष govt द्वारा inflation rate की दर बताई जाती है। अतः आपको हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि आपको अपनी investment का return inflation rate से ज्यादा मिलना चाहिए।
inflation meaning in Hindi

आज हम जानेंगे

Inflation meaning in Hindi

firstly, Inflation को समझना

secondly, Inflation के नुकसान

thirdly, Inflation के फायदे

Inflation rate in India

Conclusion.

Inflation (मुद्रास्फीति) को समझना।

Inflation (मुद्रास्फीति) को समझना सामान्य अर्थो में बहुत ही आसान है| मुद्रास्फीति का सामान्य अर्थ यह है, कि आप की मुद्रा की कीमत वर्तमान समय में कितनी वैल्यू रखती है| अतः आपने जो रुपए या पैसे आज से कुछ वर्ष पहले कमाए थे| उन रुपयों से आप आज के परिवेश में कौन सी वस्तु खरीद सकते हैं |और कितनी मात्रा में खरीद सकते हैं | उदाहरण के तौर पर देखें तो, जिसे हम ₹1000 में आज से 5 वर्ष पहले एक कुंटल गेहूं खरीद सकते थे| तो क्या आज हम वर्तमान समय में उतनी ही मात्रा में गेहूं ₹1000 में खरीद सकते हैं| शायद नहीं मतलब inflation या मुद्रास्फीति के कारण उस ₹1000 की कीमत जो 5 वर्ष पूर्व थी आज घटकर कम हो गई।
सामान्य भाषा में समझे तो Inflation Meaning मुद्रास्फीति का अर्थ महंगाई दर से होता है जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती है inflation का रेट भी बढ़ता जाता है और वस्तु की कीमत बढ़ती जाती है तथा पैसे या मुद्रा की कीमत घटती जाती है। इसके कारण हम किसी भी वस्तु की जिसको हम खरीदना चाहते हैं उसकी मात्रा या क्वालिटी में समझौता करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार की संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा हमेशा यह सलाह दी जाती है कि अपना investment वहां करें जहां पर आपको inflation Rate से या सामान्य भाषा में कहें मुद्रास्फीति की दर से उस मुद्रा का रिटर्न या ब्याज ज्यादा होना चाहिए जिससे आप की मुद्रा की कीमत कभी घटे ना अतः जो मुद्रा  आपने 5 साल पहले या 10 साल पहले कमाई है उससे आप वर्तमान समय में भी वही वस्तु  उतनी ही मात्रा में जो 5 वर्ष या 10 वर्ष पूर्व ले सकते थे आज भी वही वस्तु  उसी मात्रा में ले सकें।

Inflation (मुद्रास्फीति) के नुकसान।

Inflation या मुद्रास्फीति के नुकसान की बात करें inflation के कारण नुकसान यही होता है कि महंगाई की दर निरंतर बढ़ती रहती है,
मुद्रा की कीमत घटती रहती है इसके कारण किसी भी वस्तु की कीमत में वृद्धि हो जाने से सामान्य परिवेश में महंगाई दर बढ़ती जाती है। और वस्तु की कीमत घटती जाती हैं। मुद्रास्फीति की दर में बढ़ोतरी के कारण महंगाई दर निरंतर बढ़ती रहती है जिससे सरकार के सामने inflation या  मुद्रास्फीति एक व्यापक समस्या के रूप में विद्यमान है अत: सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि मुद्रास्फीति की दर वार्षिक रूप से कम से कम रहे और महंगाई की दर पिछ्ले वर्षों के मुकाबले कम हो जिसका एक समान्य नागरिक को ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके।एक अच्छी सरकार का निर्धारण इस बात से भी होता है कि उसने महंगाई दर पर कितना रोक लगा रखी है अतः inflation या मुद्रास्फीति को कितना कम कर रखा है जिससे सामान्य परिवेश में महगांई दर कम हो सके और समान्य नागरिक को इसका फायदा मिल सके सामान्य भाषा में बोले तो मुद्रास्फीति बढ़ने के कारण महंगाई की दर भी बढ़ जाती है और  वस्तुओं की कीमत बढ़ती जाती है।

Inflation (मुद्रास्फ़ीति) के फायदे।

सामान्य  परिवेश में 4% से कम मुद्रास्फीति की दर को अच्छा माना जाता है। लेकिन यही दर अगर बढ़ जाती है तो मुद्रास्फीति की दर बढ़ने से ज्यादातर समय नुकसान ही होता है लेकिन हम एक बिजनेसमैन या उत्पादकता की नजरों से देखे तो inflation या मुद्रास्फीति के बढ़ने के कारण महंगाई की दर बढ़ती है जिससे वस्तु की कीमत बढ़ जाती है और इसका फायदा सीधा उत्पादक को होता है अतः उसका ग्रोथ रेट बढ़ता जाता है और company मुनाफे  में रहती है वस्तु की कीमत ज्यादा होने के कारण उस वस्तु के निर्माता को ज्यादा से ज्यादा फायदा होता है।

Inflation Rate in India

Inflation Rate in India- inflation basically, मुद्रास्फीति की दर की वर्तमान स्थिति में भारत में इसकी दर की बात करें तो तो यह बीते कुछ वर्षों से 4% से लेकर 6% , 6:30 % तक रहती है | भारत में महंगाई की दर इसी प्रतिशत में कम ज्यादा होती रहती है। सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार के नियमों को लाकर हर वित्तीय वर्ष में यह कोशिश की जाती है, कि मुद्रास्फीति में विभिन्न प्रकार के निर्णय को लेकर inflation rate को कम किया जा सके कई बार सरकार सफल भी होती हैं और कई बार सरकार इस को कम करने में नाकाम रहती है अतः inflation Rate बढ़ने के कारण विपक्ष भी इस मुद्दे को उठाती है।सरकार के सामने inflation Rate को कम करना एक बहुत बड़ी चुनौती होता है।

Conclusion (निष्कर्ष)-

finally,  Inflation, उपरोक्त तथ्यों को देखकर यह निर्धारित किया जा सकता है| कि एक सामान्य परिवेश में Inflation rate या मुद्रास्फीति,की दर हमेशा कम से कम होना चाहिए| जिससे एक सामान्य नागरिक को फायदा हो सके |  देश को महंगाई की समस्या से बचाया जा सके जैसे कि महंगाई की मार उपभोक्ता को ना सहनी पड़े। सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए| जिससे महंगाई की दर कम से कम की जा सके। Inflation Rate  को कंट्रोल में रखा जा सके | कई प्रकार के पहलुओं को ध्यान में रखकर Inflation rate को कंट्रोल किया जा सकता है| अतः महंगाई को कंट्रोल किया जा सकता है| महंगाई की दर को कम किया जा सकता है।

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